He lives as if he is never going to die, and then dies having never really lived -Dali Lama

Life is journey and death is destination. So live this journey to fullest doing what you love the most. So here is what i like to do.

मैं लिखती हूँ

मैं लिखती हूँ मैं लिखती हूँ अ़फसाने कई कुछ सुनाती हूँ अपनी, तो कभी कहानी किसी राहगीर की ।

यूँ तो शिकवा नहीं,जो न समझे कोई

मैं आशा न साथ लिये फिरती हूँ , बस अंतर्मन के अल्फाजों को स्याही में पिरोती हूँ।


मैं लिखती हूँ पहाड़ों को , महक गांव की पास लिए चलती हूँ, महफिलों के शोर नहीं मैं चिड़िया के संगीत में माकूल हूँ ।


मैने परखे हैं चहरे कई मगर गोपनीयता..बरकरार रखती हूँ, मुखौटों की परवाह नहीं मुझे , मैं निगाहों से शख्स की पहचान रखती हूँ।

मैं लिखती हूँ प्रेम को जो सृष्टि का आधार है, वजूद है इन्सानियत का , उस खुदा का श्रृंगार है।


धर्म की मोहताज़ नहीं मैं, वो एक है ये मानती हूँ, जो हो जुल्म दुर्बल पर

उसके सामने स्याही से गरज लेती हूँ ।

Thanks for reading 🖤, i hope you enjoyed it. Don't forget to like, comment , share and subscribe .Thanks for your support ❤️


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